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अस्तित्व की इस लड़ाई में एक संघर्ष दायित्व का भी है।
कहो कि कैसे गुजर रही है रात भारी या दिन है गम में, या हमारी तरह जिंदगी रेत सी यूं फिसल रही है।
"अपेक्षा" और "उपेक्षा" दोनों का होना ही गलत है "अपेक्षा" खुद को घायल करती है "उपेक्षा" दूसरों को।
आँसुओ का कोई वज़न नहीं होता, लेकिन निकल जाने पर मन हल्का हो जाता है
पैसा" आज के जमाने में इज्ज़त भी पैसे देखकर किए जाते हैं, बिना पैसे के तो लोग ज़रूरत भी नहीं समझते। -तेजस्विनी कुमारी
लेकिन पूरे दिन की इस भागदौड़ में कुछ मिनट अपनी मुस्कान के लिए भी रखना।
जैसे प्यार को मानते ही नहीं थे।
दुख तो मुफ्त में मिलते है लेकिन सुख की कीमत तो देनी ही
लोग कहते हैं दु:ख बुरा होता है जब भी आता है रुलाकर जाता है लेकिन हम कहते दु:ख अच्छा होता है जब भी आता है कुछ सिखा कर जाता है !!
मैंने 'भगवान ' तो नहीं देखा फिर भी ' माँ ' के रूप मे उसका रूप देखा। मैनै ' जन्नत ' तो नहीं देखी फिर भी ' माँ ' के प्यार मे उसका ' दृश्य ' देखा