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समय का खेल भी क्या निराला है. भरी जेब ने दुनिया से पहचान करवाई, और खाली जेब ने इंसानों की।
मैंने 'भगवान ' तो नहीं देखा फिर भी ' माँ ' के रूप मे उसका रूप देखा। मैनै ' जन्नत ' तो नहीं देखी फिर भी ' माँ ' के प्यार मे उसका ' दृश्य ' देखा
"अपेक्षा" और "उपेक्षा" दोनों का होना ही गलत है "अपेक्षा" खुद को घायल करती है "उपेक्षा" दूसरों को।
माहौल यहा कुछ इस तरह है। अजब सी कशीश हर एक मनमे। जी रहा है ,हरकोई डर डर के.. मांग रहा है ,जिंदगी मर मर के ए खुदा के बंदे , ढुंड जरा जमानेमे खुशीया हजार मिलेंगी, हर एक पलमे लाखो जनम जी लेगा , बस तू एक बार जीना सीख ले।
जब इंसान जिंदगी कि अपनी सभी इच्छाओं से, मुक्त हो जाता है या कहो वो अपने सारे इन्द्रियों को, अपने काबु में रखता है, तब ही उसे शांति मिल सकती है!
लम्हे तो है बीते सारे लेकिन लगते है आज भी जैसे हो वो कल
अपनी दुओं में जो, उसका ज़िकर करता है, वो भाई है जो ख़ुद से पहले, बहन की फ़िकर करता है, थोड़ा प्यार थोड़ी तक़रार करता, अनोखा रिश्ता है भाई बहन का
खुश नसीब हैं वो बहन जिसके सर पर भाई का हाथ होता हैं चाहे कुछ भी हालात हो, ये रिश्ता हमेशा साथ होता है।
खुद की उलझने सुलझाने में लगे है, फुर्सत में करेंगे हिसाब तुमसे ए - ज़िंदगी II
कहो कि कैसे गुजर रही है रात भारी या दिन है गम में, या हमारी तरह जिंदगी रेत सी यूं फिसल रही है।