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समझ लेना तुम मुझे मेरे बिना कहे खामोशी समझना भी प्रेम ही है
उम्मीद छोड़ी हैं तुमसे मोहब्बत नहीं.
बात जो भी हो सामने बया होती है ए दोस्त इश्क़ में चालाकियाँ कहाँ होती है
व्यक्ति कर्मों में जीता है वर्षों में नहीं
जैसे कभी जानते ही नहीं थे
सपने वो नहीं जो हम सोते वक्त देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।
पैसा ही नहीं एक मात्र Measurement है सफलता की
इससे ज्यादा इश्क का सबूत और क्या दूं साहब मैंने उसके जिस्म को नहीं उसकी रूह को चुना है
अगर सुबहे आपकी उदास रहेंगी तो शामे फिर किस आस में
तुम ना ही मिलते तो अच्छा था,