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केवल वे ही लोग, जो अपने दिमाग का कचरा किनारे रख सकते हैं, वास्तव में प्रेम और करुणा के काबिल होते हैं ।
तर्क से परे एक आयाम है। जब तक आप वहां नहीं पहुंच जाते, आप ना तो प्रेम की मधुरता, ना ही ईश्वर को जान पाएंगे ।
प्रेम एक समाहित करने की प्रक्रिया है। जब एक बार आपको मैं अपने एक अंश के रूप में शामिल कर लेता हूं, मैं आपके साथ वैसा ही होऊंगा, जैसा मैं खुद के साथ हूं। - सद्गुरु
प्रेम हमेशा सच्चा नहीं होता। ज्यादातर समय तो यह एक भ्रम होता है। लेकिन एक बात सच है, प्यार के बिना जीवन फीका है।
मुझे खुद पर इतना भरोसा है कि यह दिल हजारों के बीच रहकर भी सिर्फ आपका रहेगा.
जिस व्यक्ति के अंदर स्वयं को खोने का डर नहीं है, जो इससे मुक्त हो चुका है, वही प्रेम को जान सकता है, वही प्रेम बन सकता है ।
आप प्रेम में ऊंचे नहीं उठ सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते, आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते – आपको लव (प्रेम) में फॉल करना (गिरना) होगा। अगर आप भावनाओं के जादू को जानना चाहते हैं, तो आपके कुछ अंश को फॉल करना (गिरना) होगा।
आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते, आप प्रेम में चढ़ नहीं सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते - आप प्रेम में सिर्फ डूब सकते हैं ।
ईश्वर से कोई भी प्रेम कर सकता है क्योंकि वह आपसे कुछ नहीं मांगता। पर अपने पास खड़े व्यक्ति से प्रेम करने की कीमत जीवन से चुकानी पड़ती है ।
मूल रूप में, प्रेम का अर्थ हैः पसंदों और नापसंदों से ऊपर उठ जाना।