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हर रक्षा बंधन मैं अपने मन के भीतर तुम्हारी सुख, समृद्धि का संकल्प लेता हूँ।

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दुख तो मुफ्त में मिलते है, लेकिन सुख की कीमत तो देनी ही पड़ती है
मेरे भीतर पनपे विश्वास की जड़ तुम हो बहना, मेरी जीत का एकलौता श्रेय तुम हो बहना
मैं निकला सुख की तलाश में, रास्ते में खड़े दुखों ने कहा, ‘हमें साथ लिए बिना, सुखों का पता नहीं मिलता जनाब।
इतनी भी चालाकी अच्छी नहीं , कि तुम भगवान को सुख में नहीं बस दुःख में याद करते हो।
हर रक्षा बंधन मैं अपने मन के भीतर तुम्हारी सुख, समृद्धि का संकल्प लेता हूँ । संकल्प
ईमानदारी की इच्छाओं पर अडिग रहना तुम्हीं से सीखा है बहन तुम्हारे कदमों के निशान पर, मैंने मेरे वजूद को सींचा है -- मयंक विश्नोई
हर दुःख आने वाले सुख की चिठ्ठी होती है, और हर नुक्सान होने वाले फायदे का
भय्या राखी के बंधन को निभाना, बेहन को ना भूलना।
कर्म सदैव सुख न ला सके परन्तु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता।
अच्छे काम करते रहिये चाहे लोग तारीफ करें या न करें आधी से ज्यादा दुनिया सोती रहती है ‘सूरज’ फिर भी उगता हैं।