#Hindi Quote
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न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
ज़रा संभाल कर रखा कीजिए अपने ज़ख्मों को, आज कल लोग मरहम और महरूम में फ़र्क़ नहीं करते
शायद ये चेहरा मेरा नहीं है लेकिन कुछ चेहरे देखकर मुझे मेरा चेहरा बदलने का मन करता है।
व्यक्ति कर्मों में जीता है वर्षों में नहीं
मैंने कुछ वक्त चुप रहकर भी देख लिया, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
आज टुटा एक तारा देखा, बिल्कुल मेरे जैसा था, चाँद को कोई फर्क नहीं पड़ा, बिल्कुल तेरे जैसा था.
उम्मीद छोड़ी हैं तुमसे मोहब्बत नहीं.
किसी से नफरत रखने में उतना मजा नहीं है, जितना उसे माफ कर भुला देने में है।