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नही हो अब तुम हिस्सा मेरी किसी हसरत के,
तुम बस काबिल हो बस मेरी नफरत के।
समझ नहीं आता किस पर भरोसा करू,
जब वक़्त अच्छा होता है तब नफरत करने वाले भी चाहने लगते है, लेकिन जब वक़्त बुरा होता है तो चाहने वाले भी नफरत करने लगते है।
इससे ज्यादा इश्क का सबूत और क्या दूं साहब मैंने उसके जिस्म को नहीं उसकी रूह को चुना है
प्यार करना सीखिए, फिर वो खुद से ही क्यों न हो। आजकल नफरत तो हर कोई करता है।
तुम ना ही मिलते तो अच्छा था,
चाहे जितना भी टाइम लग जाए पर मुझे इस जिंदगी में सिर्फ तू ही चाहिए
बात जो भी हो सामने बया होती है ए दोस्त इश्क़ में चालाकियाँ कहाँ होती है
ये वही लोग है जिन्हें प्यार में सिर्फ नफरत ही मिलती है।