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नही हो अब तुम हिस्सा मेरी किसी हसरत के,
मैं इश्क लिखूं और उसे हो जाए काश मेरी शायरी में कोई ऐसे खो जाए
दूसरों की बातों में आकर वैसा कभी मत बनना, जैसा तुम खुद कभी बनना नही चाहते।
धोखा देकर ऐसे चले गए,
तेरी हर एक बात को हंसते-हंसते सह लूंगा बस मोहब्बत में शामिल कोई और ना हो
प्यार करना सीखिए, फिर वो खुद से ही क्यों न हो। आजकल नफरत तो हर कोई करता है।
किसी से नफरत रखने में उतना मजा नहीं है जितना उसे माफ कर भुला देने में है।
अब बात नफरत की है तो नफरत ही सही।
जैसे प्यार को मानते ही नहीं थे।
ये वही लोग है जिन्हें प्यार में सिर्फ नफरत ही मिलती है।