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तुम बस काबिल हो बस मेरी नफरत के।
समझ लेना तुम मुझे मेरे बिना कहे खामोशी समझना भी प्रेम ही है
चाहे जितना भी टाइम लग जाए पर मुझे इस जिंदगी में सिर्फ तू ही चाहिए
तुम ना ही मिलते तो अच्छा था,
दुनिया से दोस्ती अच्छी है , मगर भगवान की यारी की तो बात ही कुछ और है।
तुम से जो मोहबत थी ना,
कितना मुश्किल होता है उस शख्स को मनाना, जो रूठा भी ना हो और बात भी ना करे।
समझ नहीं आता किस पर भरोसा करू,
जिस बात से डर लगता हो, उस क्षेत्र में अपना ज्ञान बढ़ाना आरंभ कर दें, डर भाग जाएगा, डर सदैव अज्ञानता से उपजता है !
बात जो भी हो सामने बया होती है ए दोस्त इश्क़ में चालाकियाँ कहाँ होती है