#Hindi Quote

इससे ज्यादा इश्क का सबूत और क्या दूं साहब मैंने उसके जिस्म को नहीं उसकी रूह को चुना है

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इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
समझ नहीं आता किस पर भरोसा करू,
दुनिया को नफरत का सुबूत नहीं देना पड़ता,
बात जो भी हो सामने बया होती है ए दोस्त इश्क़ में चालाकियाँ कहाँ होती है
अब वो नफरत में बदल गयी है।
अब बात नफरत की है तो नफरत ही सही।
सोचता हूं आज इश्क जता दूं क्या तुमसे मोहब्बत है यह तुम्हें बता दूं क्या.
जैसे कभी जानते ही नहीं थे
तुम ना ही मिलते तो अच्छा था,
तेरी एक मुस्कान से सुधर गयी तबियत मेरी, बताओ यार इश्क करते हो या इलाज करते हो!