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जो मुझे रोज़ देखता है उसकी ईनायत देखनी है खुदा के पास पहुंच अपनी हैसियत कहनी है।

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कहाँ तक जाऊं, हर तरफ तो अंधेरा है, लेकिन मेरा हौसला है जो मुझे कभी कमजोर नहीं होने देता।
जीत की उम्मीद रखते हो बहाने बनाके चलने का शौक है क्या।
जब तक सिर से पाँव तक पसीना न आ जाए, मेहनत करते रहो, सफ़लता जरूर मिलेगी।
रोज रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़ा हूँ, ए मुश्किलों देखो मैं तुमसे कितना बड़ा हूँ।
लगी है आग सीने में, तो दिखना भी चाहिए, ताकि इसकी चिंगारी से दूसरे भी जल सकें।
सपने देख लेना पर पूरा करने कि हिम्मत भी रखना।
यूँ जमीन पर बैठकर क्यूँ आसमान देखता है पँखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है
मैं हर रात की ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता, हुन मगर रोज सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती हैं.
ज़िन्दगी परेशान करेगी, कभी दुख से, कभी संघर्ष से, कभी किस्मत से, पर एक चीज तुम्हें आगे बढ़ाएगी, वह है मेहनत।
ज़िन्दगी मुझे सताती बहुत है, मेरी मेहनत देख खफ़ा जो रहती है।