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घायल तो यहां हर परिंदा है, मगर जो फिर से उड़ सका वहीं जिंदा
खुद को व्यस्त नहीं व्यवस्थित कीजिए, सफलता का यह पहला मंत्र है!
घायल तो यहां हर परिंदा है. मगर जो फिर से उड़ सका वहीं जिंदा है.
हुनर तो सब में होता हैं फर्क बस इतना होता हैं किसी का छिप जाता हैं तो किसी का छप जाता हैं
सोचने से कहाँ मिलते है तमन्नाओ के शहर, चलना भी जरुरी है मंजिल पाने के लिए!
घायल तो यहां हर परिंदा है, मगर जो फिर से उड़ सका वहीं जिंदा है
जो रातों को कोशिशों में गंवा देते हैं, वहीं सपनों की चिंगारी को और हवा देते है।
"अपेक्षा" और "उपेक्षा" दोनों का होना ही गलत है "अपेक्षा" खुद को घायल करती है "उपेक्षा" दूसरों को।
अगर तू चलने के लिए तैयार हो तो, मंजिल तुम्हारे सामने झुकने के लिए तैयार हो जायेगी
कोई भी लक्ष्य मनुष्य ने साहस से बड़ा नहीं, हरा वही है बस, जो लड़ा नहीं।