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जो मनुष्य इसी जन्म में मुक्ति प्राप्त करना चाहता है, उसे एक ही जन्म में हज़ारों वर्षों का काम करना पड़ता है।– स्वामी विवेकानंद
टूटने लगे होसले तो ये याद रखना, बिना मेहनत के तख्तों-ताज नहीं मिलते, ढूंढ लेते हैं अंधेरों में मंजिल अपनी, क्योंकि जुगनू कभी रौशनी के मोहताज नहीं होते।
मैदान से हारा हुआ इंसान तो फिर से जीत सकता है, लेकिन मन से हारा हुआ इंसान कभी नहीं जीत सकता इसलिए मन से कभी हार मत मानना।
किसी भी कार्य करने के लिए तुरन्त उठो, जागो और तब तक नहीं रुकना जब तक लक्ष्य हासिल न हो जाए।– स्वामी विवेकानंद
मेहनत सीढ़ियों की तरह होती है और भाग्य लिफ्ट की तरह। लिफ्ट तो किसी भी समय बंद हो सकती है, पर सीढ़ियाँ हमेशा ऊंचाई की ओर ही ले जाती हैं!
मैले कपडे फिर भी चल जाएंगे , मगर मैला मन लंगड़ा होता है।
आँसुओ का कोई वज़न नहीं होता, लेकिन निकल जाने पर मन हल्का हो जाता है
किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये – आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत राह पर चल रहे हैं– स्वामी विवेकानंद
मन का भाव पुण्य से बढ़कर है।
कोई किसी का नहीं होता दुनिया में, जब दिल भर जाता है तो लोग याद करना भी छोड़ देते है।