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मुझपर बहुत जिम्मेदारियां थी मेरे घर की, माफ करना मैं तेरे इश्क में मर नहीं सकता
आया राखी का त्यौहार , छाई खुशियों की बहार , एक रेशम की डोरी से बाँधा , एक बहन ने अपने भाई की कलाई पर प्यार
कुछ पल का साथ देकर तुमने, पल पल के लिए बेचैन कर दिया
सहमी हुई थी झोपड़ी बारिश के खौफ से, मेहलो की आरजू थी के बारिश जरा जम के बरसे
जीवन में अगर ये समज गये की क्या याद रखना है और क्या भूलना तो आप बहुत आगे निकल गये हो ।
किस्मत की लकीरों पर ऐतबार करना छोड़ दिया, जब इंसान बदल सकते हैं तो किस्मत क्यों नहीं
धोका ऐसे ही नही मिलता, भला करना पड़ता है लोगो का
सबर मेरा कोई क्या ही आजमाएगा, मैंने हंस के छोड़ा है उसे जो मुझे सबसे प्यारा था
जहां में डूबा था मुझे वही किनारा चाहिए, तू फिर आ मेरे पास मुझे तू दोबारा चाहिए
अरे इतनी नफरत है उसे मुझसे की मैं मर भी जाऊं, तो उसे कोई फर्क नही पड़ेगा