#Hindi Quote

स्वयं के प्रति ईमानदार होना आत्म-सम्मान का सर्वोच्च रूप है। यदि आप कुछ महसूस नहीं कर रहे हैं, तो इसे न करें।

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दूसरों को खुश करने के लिए अपने मूल्यों से समझौता न करें। अपने स्वाभिमान को अक्षुण्ण रखें और चले जाएँ।
परिपक्वता उन लोगों और स्थितियों से दूर चलना सीखना है जो आपके मन की शांति, आत्म-सम्मान, मूल्यों, नैतिकता और आत्म-मूल्य को खतरे में डालती हैं।
खुद को नीचा दिखाना आत्म-सम्मान की हत्या है, खुद को उठाना उसकी पूजा।
भाई-बहन वे लोग हैं जो हमें प्यार, सराहना और समझने के लिए महसूस करते हैं, चाहे जिंदगी हमें कहाँ ले जाए।
स्वाभिमान से अधिक निकट स्वार्थ जैसा कुछ नहीं है।
आत्म-सम्मान से भरी हर मुस्कान आपके आत्म-विश्वास की कहानी कहती है
किसी के लिए या किसी भी चीज़ के लिए अपने मानकों को कम न करें। स्वाभिमान ही सब कुछ है।
खुद का भला करना एक और तरह का सम्मान है।
मेरे आत्म-मूल्य की एक बूंद भी आपकी स्वीकृति पर निर्भर नहीं करती है।
यदि हम अपने आप को उच्च सम्मान में नहीं रखते हैं, तो दूसरे जाने-अनजाने में न तो हमें देखेंगे और न ही हमारे साथ सम्मान से पेश आएंगे।