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ईश्वर या कोई और आपसे प्यार करता है या नहीं, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आपका स्वयं का प्रेमपूर्ण होना ही आपके जीवन को सुखद व मीठा बनाता है।

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ईश्वर से कोई भी प्रेम कर सकता है क्योंकि वह आपसे कुछ नहीं मांगता। पर अपने पास खड़े व्यक्ति से प्रेम करने की कीमत जीवन से चुकानी पड़ती है।
योग एक जबरदस्त प्रेम प्रसंग है। यह जीवन के हर रूप और हर आयाम को शामिल करने की प्रक्रिया है।
जिसका खारा वो ही सोच रहा है, और जिसका मीठा वो ही बोल रहा है।
ईश्वर से कोई भी प्रेम कर सकता है क्योंकि वह आपसे कुछ नहीं मांगता। पर अपने पास खड़े व्यक्ति से प्रेम करने की कीमत जीवन से चुकानी पड़ती है ।
जीवन के इस सफर में अगर भगवान को साथी बना लिया, तो तूफान जरूर आएंगे, लेकिन कुछ बिगाड़ नहीं पाएंगे
तर्क से परे भी एक जगह है। जब तक आप वहां नहीं पहुंचते, आप न तो प्रेम की मिठास को जान पाएंगे और न ही ईश्वर को।
आप प्रेम में ऊंचे नहीं उठ सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते, आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते – आपको लव (प्रेम) में फॉल करना (गिरना) होगा। अगर आप भावनाओं के जादू को जानना चाहते हैं, तो आपके कुछ अंश को फॉल करना (गिरना) होगा।
ज्यादातर लोगों के लिए, प्रेम का मतलब होता है, ‘तुम्हें वही करना चाहिए, जो मैं चाहता हूं।’ नहीं, प्रेम का असली मतलब है कि वे जो चाहें कर सकते हैं, और हम फिर भी उन्हें प्रेम करते हैं।
अगर आपके हृदय में प्यार है तो ये सारा जीवन आपका मार्गदर्शन करेगा। प्यार की अपनी बुद्धिमत्ता होती है।
दुनिया के 7.5 अरब लोगों में से अपने आपको निकाल कर, अगर आप बहुत अकेलापन महसूस करते हैं तो ये प्यार नहीं है, मोह है।