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जब परिवार में स्वार्थ के विवाद हो जाता है, तो धीरे धीरे परिवार बिखर जाता है

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जो बहार की सुनता है वो बिखर जाता है, जो भीतर भी सुनता है वो सवर जाता
स्वाभिमान से अधिक निकट स्वार्थ जैसा कुछ नहीं है।
जो कभी ना भर पाए ऐसा भी एक घाव है, जी हां उसका नाम लगाव है
परिवार के साथ घर जाकर अच्छा खाना खाने और आराम करने से अच्छा और कुछ नहीं है।
मिट्टी का मटका और परिवार की कीमत, सिर्फ बनाने वालो को पता होती है, तोड़ने वालो को नहीं
जहाँ सूर्य की किरण हो, वहीं प्रकाश होता है, और जहाँ प्रेम की भाषा हो, वहीं परिवार होता है।।
कहने को तो ज़िंदगी में हमसे हज़ारों लोग मिल जाते हैं लेकिन हमारी हज़ारों गलतियों को माफ करने वाले मां बाप दुबारा नहीं मिलते।
जीत जाए या हार जाए इंसान की ख्वाहिश होती है की अपने परिवार के पास जाय।
परिवार का तुम पर स्नेह बड़ा, मैं भी तुम पर गर्व करता हूँ बहन तुम्हें खुश रखने का ही मैं अपना धर्म समझता हूँ -- मयंक विश्नोई
जीवन के वो पल बहुत ख़ास होता है, जब परिवार आपके साथ होता है