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सोचता हूं आज इश्क जता दूं क्या तुमसे मोहब्बत है यह तुम्हें बता दूं क्या..
प्रेम एक समाहित करने की प्रक्रिया है। जब एक बार आपको मैं अपने एक अंश के रूप में शामिल कर लेता हूं, मैं आपके साथ वैसा ही होऊंगा, जैसा मैं खुद के साथ हूं। - सद्गुरु
जिनकी नज़रें अपनी मंज़िलो पर होती हैं… उनका ध्यान सिर्फ अपनी राहों पर होता है… वो ये नहीं देखते कि हमारे आसपास के लोग क्या कहते हैं
तुमसे मिलकर बात करके जो खुशी होती ह वह खुशी आज तक किसी से मुझे नसीब नहीं हुई
बड़ी अजीब होती है ये यादें, कभी हसा देती है, कभी रुला देती है
ईश्वर से कोई भी प्रेम कर सकता है क्योंकि वह आपसे कुछ नहीं मांगता। पर अपने पास खड़े व्यक्ति से प्रेम करने की कीमत जीवन से चुकानी पड़ती है ।
मंज़िल उन्हीं को मिलती है , जिनके सपनों में जान होती है
प्रेम की गहराई को जानने के लिए आपके कम-से-कम कुछ अंश को मिटना होगा। वरना किसी दूसरे के लिए जगह नहीं होगी ।
मेरी जान मेरी दुआ है मुझे हर जन्म में तुमसे ही मोहब्बत हो..
महानता वह नहीं होती कि आप गिर गए और उठे ही ना, महानता उसे कहते हैं जब आप गिरकर बार-बार उठते हैं।