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खामोश चहरे पर हजारों पहरे होते है, हस्ती आंखो में भी ज़ख्म गहरे होते है

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बचपन कितना खूबसूरत था, तब खिलोने जिंदगी थे, आज जिंदगी खिलौना है
उजड़ी हुई दुनियां को तू आबाद ना कर, बीते हुए लम्हों को तू याद ना कर, एक कैद परिंदे ने कहा हमसे, मैं भूल चुका हु उड़ान तू मुझे आजाद ना कर !!!
अगर आसुओं की कीमत होती, तो कल रात वाला तकिया अरबों का होता
ज़िंदगी में एक सोच बेमिसाल रखो, हालात चाहे जैसे भी हो चेहरे पर मुस्कान रखो
ज़ख़्म जब मेरे सीने के भर जाएँगे ; आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे ; ये मत पूछना किस किस ने धोखा दिया; वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएँगे।
हज़ारों उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब, इसी का नाम है ज़िंदगी चलते रहिए जनाब- गुलज़ार
परिंदो को मंजील मिलेगी यकिनन ये फैले हुए उनके पर बोलते है, वो लोग रहते है खामोश अक्सर जमाने में जिनके हुनर बोलते है।
सुकून ढूंढना है तो खुद में ढूंढो, लोगों में ढूंढोगे तो बेचैन रहोगे
जब इंसान अन्दर से टूटता है तो बहार से खामोश हो जाता
मसला तो सुकून का है, वरना ज़िंदगी तो हर कोई काट रहा है