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चार युगों में सिमटी श्रृष्टि, चार पहर का सन्नाटा है बहन तुम्हारे कदमों में बैठ, मन मेरा निश्चल हो जाता है-मयंक विश्नोई
बहन उन्हीं के हिस्से आती है, जिनके होते हैं कर्म महान सभ्यताओं का संरक्षण करती, नारी ही करती है कल्याण
बहना दूर होकर तुमसे, काल के कुचक्र में फंसकर मजबूर हूँ हर संकट का डटकर सामना करूंगा क्योंकि मैं तुम्हारा कोहिनूर हूँ-मयंक विश्नोई
जो समस्याएं तुम्हें सताने लगे, कोई तुम पर उंगली उठाने लगे डरना नहीं-घबराना नहीं, बहन एक बार बढ़े क़दम को पीछे हटाना नहीं-मयंक विश्नोई
तुम्हारे बिना तुम्हारे भाई के अस्तित्व का कोई अंदाज़ा नहीं! आपकी खुशी के बिना, खुशी की गिनती नहीं हो सकती
आशाओं की किरण ओझिल हो नहीं सकती नारी भी कभी यूँ ही अवला हो नहीं सकती मेरी बहन को देखा मैंने, जो वीरांगना की परिभाषा हैं उसके होने पर मैं निर्भय, वो मेरी विजय की आशा है
बसंत की बहार लिए तूं एक अलग किस्म की फुलकारी है बहन मेरी किस्मत है अच्छी, जो तुझसे मेरी यारी है-मयंक विश्नोई
पाँच तत्व के इस पुतले ने तुझसे पाया जीने का मकसद मेरी बहन तेरे होने से ही, भाई तेरा खुशहाल है अब तक-मयंक विश्नोई
इंद्रधनुष के सात रंगों सी, हैं प्यारी बहन तेरी मुस्कान जैसे आशाओं के दीप के आगे नतमस्तक सारा जहान-मयंक विश्नोई
आकाश में जितने भी तारे हैं या कि वह प्रतिबिंब हमारे हैं बगिया है जैसे बहना की तरह, जिसने फूल दिए कई सारे हैं।