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अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
मेरी जिंदगी एक बंद किताब है, जिसे आज तक किसी ने खोला नहीं, जिसने खोला उसने पढा नही, जिसने पढा उसने समझा नही, और जो समझ सका वो मिला नहीं।
वक़्त के साए में छुपी है जिंदगी की राह, खुदा की ख़फ़ा आँखों में बस गया है इक दर्द का जहर!
जरूरी नहीं कि सारे सबक किताबों से ही सीखें जाते है, कुछ सबक जिंदगी और रिश्ते भी
तू जिंदगी को जी उसे समझने की कोशिश न कर
जिनकी ज़िंदगी बहुत भीड़ होती है, वहां से निकलना ही सही होता है I
यदि हर सुबह नींद खुलते ही किसी लक्ष्य को लेकर आप उत्साहित नहीं है, तो आप जो नहीं रहे जिंदगी सिर्फ काट रहे है
जिंदगी में किसी से अपनी तुलना मत करो जैसे चांद और सूरज की तुलना किसी से नहीं की जा सकती क्योकि यह अपने समय पर ही चमकते है
कभी अंदाज से तो कभी नजरअंदाज से, जिंदगी जिएं जनाब अपने अलग अंदाज से।
मुस्कुराना तो आदत है हमारी जनाब, वरना ज़िंदगी तो हमसे भी नाराज है