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जिंदगी रेल सी गुजर रही हैं, उम्मीदे स्टेशन सी छूट रहीं हैं.
हँसकर दर्द छुपाने का हुनर मशहूर था मेरा ! पर कोई हुनर काम न आया जब तेरा नाम आया.
इन फासलों के पीछे सब फैसले तुम्हारे थे.
समय अनुभव तो देता है, मगर मासूमियत छिन लेता है
ज्यादा बात करने वाले कुछ नहीं कर पाते और कुछ कर दिखानेवाले ज्यादा बात करने में यकिन नहीं रखते!
जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं.
हुस्न वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का ! बड़ी मासूमियत से कहते हैं मजबूर थे हम !!
ये दिन भी क़यामत की तरह गुज़रा है ! न जाने क्या बात थी हर बात पर रोना आया.
उम्मीद छोड़ी हैं तुमसे मोहब्बत नहीं.
जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं