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खुद पर काबु रखना एक परिपक्व इंसान की निशानी है; वक्त से पहले खुद पर काबु खो देना अपरिपक्वता की पहचान है।

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मुस्कुराते हुए इंसान की कभी जेबे देखना ! हो सकता है रूमाल गिला मिले.
इंसान एक ऐसा ग़ाफिल मंसूबा साज़ है कि वह अपनी सारी जिंदगी की प्लानिंग में कभी अपनी मौत को शामिल ही नहीं
जो इंसान कभी हार नहीं मानता, वो हमेशा जीतें।
कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए, भीड़ साहस तो देती है, मगर पहचान छिन लेती है।
घाव ठिक हो जाने से, हादसे नही भूले जाते..
पहचान से मिला काम थोडे बहुत समय के लिए रहता हैं लेकिन काम से मिली पहचान उम्रभर रहती हैं
काम करो ऐसा कि एक पहचान बन जाए,हर कदम ऐसा चलो कि निशान बन जाए,यहां जिंदगी तो हर कोई काट लेता है,जिंदगी जियो इस कदर कि मिसाल बन जाए
वो मुश्किल दौर ही होता है जो इंसान को मज़बूत बना देता है ताकी वो हीरे की तरह चमक सके
जो इंसान मन की तकलीफों को नही बता पता, उसे ही गुस्सा सबसे ज्यादा आता है।
इंसान का सारा ध्यान आज बस इस बात पर है कि ज़िंदगी जीने के तरीकों में कैसे सुधार किया जाए।