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घर की बाते जब , मोहल्ले में पहुंच जाएंगी तो जमे जमाए घर की नीव तो हिलेगी ही।

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समय का खेल भी क्या निराला है. भरी जेब ने दुनिया से पहचान करवाई, और खाली जेब ने इंसानों की।
उम्मीद की बस एक किरण ही काफी है , आपकी आँखों में आयी नमी को सुखाने के लिए।
जब लोग आपको करने लगें तो समझ लेना जिंदगी में हो रहे हों.
जब इंसान अन्दर से टूटता है तो बहार से खामोश हो जाता है।
अगर आप खुश रहना चाहते हो , तो आपको अपना मन इस दुनिया से नहीं लगाना है।
ख्वाहिशो को आप कितना ही पूरा कर लो , ज़िंदगी पूरी हो जाएगी मगर ये पूरी नहीं होंगी।
इंतजार करने वाले को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते है।
घर की बाते जब मोहल्ले में पहुंच जाएंगी तो जमे जमाए घर की
कोई सहकर भी खुश रहता है , और कोई कहकर भी दुखी ही रहता है।
वो जो ख़ुशी होती है ना , वो और कही नहीं बस आपके मन में ही होती है।