#Hindi Quote
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ज्यादातर लोगों के लिए, प्रेम का मतलब होता है, ‘तुम्हें वही करना चाहिए, जो मैं चाहता हूं।’ नहीं, प्रेम का असली मतलब है कि वे जो चाहें कर सकते हैं, और हम फिर भी उन्हें प्रेम करते हैं।
ईश्वर या कोई और आपसे प्यार करता है या नहीं, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आपका स्वयं का प्रेमपूर्ण होना ही आपके जीवन को सुखद व मीठा बनाता है।
निपुणता हमेशा आपके आसपास के लोगों के प्रति आपके प्रेम और परवाह का नतीजा होनी चाहिए - न कि एक मशीनी और उदासीन कार्य-भावना का।
प्रेम करने की, दूसरों तक पहुँचने और जीवन को अनुभव करने की आपकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है। सीमाएं सिर्फ शरीर और मन के काम करने की होती हैं।
मूल रूप में, प्रेम का अर्थ हैः पसंदों और नापसंदों से ऊपर उठ जाना।
प्यार के लिये कोई बीमा नहीं होता, कोई गारंटी नहीं होती। इसे जीवित रखने के लिये जागरूकता चाहिये।
प्रेम कोई रिश्ता नहीं है। प्रेम तो भावनाओं की एक तरह की मिठास है।
प्रेम तो खुद का पूर्ण समर्पण है इसमें ईगो और अनादर का कोई स्थान नहीं होता.
तर्क से परे भी एक जगह है। जब तक आप वहां नहीं पहुंचते, आप न तो प्रेम की मिठास को जान पाएंगे और न ही ईश्वर को।
प्रेम की गहराई को जानने के लिए आपके कम-से-कम कुछ अंश को मिटना होगा। वरना किसी दूसरे के लिए जगह नहीं होगी ।